पेंट और वार्निश में मौजूद रसायन लोगों में नसों से जुड़ी विकृति मल्टीपल स्कलेरोसिस का खतरा बढ़ा सकती है। एक नए अध्ययन में ऐसा दावा किया गया है। यह अध्ययन ‘ न्यूरोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
इस अनुसंधान में पाया गया कि पेंट या अन्य विलायकों (सॉल्वेंट) के संपर्क में आने वाले लोगों में ऐसे लोगों के मुकाबले मल्टीपल स्कलेरोसिस होने का खतरा 50 प्रतिशत ज्यादा बढ़ जाता है जो इसके संपर्क में बिलकुल नहीं आते। मल्टीपल स्कलेरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें दिमाग और रीढ़ के नसों का सुरक्षा कवच नष्ट हो जाता है।
अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि जिन लोगों में मल्टीपल स्कलेरोसिस का खतरा पैदा करने वाले वंशाणु होते हैं और जो विलायकों के संपर्क में रहते हैं उनमें यह बीमारी होने का खतरा सात गुणा ज्यादा बढ़ जाता है। साथ ही उन्होंने बताया कि जो लोग धूम्रपान करते हैं उनमें यह खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।
अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि धूम्रपान करने वाले जो लोग विलायकों के संपर्क में रहते हैं और जिनमें इस बीमारी से संबंधित वंशाणु होते हैं उनमें यह जोखिम उन लोगों के मुकाबले 30 प्रतिशत तक ज्यादा बढ़ जाता है जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया या जो कभी विलायकों के संपर्क में नहीं रहे और जिनमें ऐसे वंशाणु नहीं थे।
स्वीडन के स्टाकहोम में करोलिंस्का इंस्टीट्यूट के अन्ना हेडस्टॉम कहते हैं कि ये बहुत महत्वपूर्ण संकेत हैं जाहां कारकों की अपेक्षा संयोजन में बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। हेडस्ट्रॉम कहते हैं कि यह समझने के लिए और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है कि ये कारक इस जोखिम को बनाने के लिए कैसे एक दूसरे को प्रभावित करते हैं। वे कहते हैं कि यह संभव है कि सॉल्वेंट और धूम्रपान के संपर्क से फेफड़े में सूजन और जलन हो सकती है। अध्ययनकर्ताओं ने अपने अध्ययन के दौरान ऐसे 2047 लोगों की पहचान की जिन्हें हालही में स्वीडन में मल्टीपल स्कलेरोसिस का निदान किया गया था और उसी उम्र और लिंग के 2,947 लोगों के साथ उनका मिलान किया था।